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मौली की बत्ती और शुद्ध घी का दीपक अष्टमी-नवमी की मध्य रात बढ़ाएगा सौभाग्य

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नवरात्री के नौ दिन मां दुर्गा की विधि-विधान से की गई पूजा व्यक्ति को हर कष्ट से मुक्ति दिलाती है।लेकिन यदि अष्टमी और नवमी की मध्य रात आप पूरी आस्था के साथ खास उपाय को करते हैं तो किसी भी तरह की नजर बाधा दूर हो जाएगी और सौभाग्य में बढ़ोत्तरी होगी।उपाय में साफ शुद्ध वस्त्र पहनकर अष्टमी और नवमी के मध्य रात 12 बजे के बाद घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।दीपक शुद्ध घी का होना चाहिए और बत्ती लाल रंग के मौली की होनी चाहिए।मां दुर्गा का ध्यान करके दीपक को मुख्य दरवाजे पर रखें।प्रार्थना करें कि मां आपके जीवन को खुशियों से भर दें।नवमी की सुबह दुर्गासप्तशती का पाठ करें।9 साल से छोटी उम्र की 9 कन्याओं को भोजन कराएं।भोजन में खीर को अवश्य शामील करें।मां दुर्गा को सुहाग की सामग्री भेट करें।किसी भी माता के मंदिर में फल का दान करें।आपको या आपके परिवार में किसी को भी अगर नजर बाधा है वो दूर हो जाएगी।काम बनते –बनते रुक जा रहा है वो पूरा होगा।

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‘महाष्टमी को एक उपाय’ दिलाएगा जॉब, दूर होगी आर्थिक तंगी और कलह

नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा का दिन है, शक्ति उपासना का दिन है।आप किसी तरह की आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं,जॉब नहीं मिल रही है,घर में कलह हो रहा है।महाष्टमी के दिन महागौरी की पूजा कर प्रार्थना करें और एक आसान सा उपाय करें आपकी हर परेशानी दूर हो जाएगी।
आर्थिक तंगी दूर करने के उपाय
पीले रंग का आसन लें उस पर उत्तर दिशा में मुंह करके बैठ जाएं।उसके बाद 9 तेल के दिए जलाएं।चावल को लाल रंग से रंग कर दिए के सामने उसकी ढ़ेरी बनाएं।ढ़ेरी पर श्रीयंत्र रखें। लाल फूल,रोली,कुमकुम,धूप,दीप से पूजा करें। जब पूजा पूरी हो जाए एक प्लेट लें।प्लेट पर रोली से स्वास्तिक बनाकर पूजा करें।प्रार्थना करें कि घर से आर्थिक तंगी दूर हो जाए।अब यंत्र को घर के पूजा स्थान पर स्थापित कर दें।पूजा के बाद बचे हुए शेष सामग्री को नदी में प्रवाहित कर दें।मां दुर्गा बहुत जल्दी ही आपकी आर्थिक तंगी दूर करेंगी।ध्यान रहे आप जो भी उपाय करें पूरी श्रद्धा और आस्था से करें।
शीघ्र जॉब प्राप्ति के लिए उपाय
महाष्टमी के दिन स्नान करके पूर्व दिशा में मुंह करके सफेद रंग के आसन पर बैठेकर मां दुर्गा का ध्यान करें।ध्यान करने के बाद अपने सामने पीले रंग का कपड़ा बिछा लें।कपड़े पर स्फटिक का 108 मनके का माला रख दें।केसर,इत्र धूप,दीप से माला की पूजा करें।‘ऊं ह्लीं वागवादिनी भगवती मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु फट स्वाहा’ मंत्र का जाप करें।महाष्टमी से शुरु करके लगातार 11 दिन तक यह उपाय करें।11 दिन के बाद ये माला अभिमंत्रित हो जाएगा।इसके बाद आप जिस भी इंटरव्यू में जाए इस माले को पहनकर जाएं आपको सफलता अवश्य मिलेगी।उपाय विश्वास के साथ करें तभी फलित होगा।
पारिवारिक कलह दूर करने के उपाय
आजकल पारिवारिक कलह एक आम समस्या बन गई है।इस नवरात्रि में महाष्टमी के दिन आप एक खास उपाय करें ताकि घर से कलह दूर हो जाए।महाअष्टमी के दिन घर के मंदिर में स्नान करके शुद्ध आसन पर बैठें।पूजा ध्यान के बाद 108 बार दिए गए मंत्र से अग्नि में आहूति दें।मंत्र है ‘सब नर करहिं परस्पर प्रीति।चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति’।।महाष्टमी से शुरु करके 21 दिन तक 1 माला मंत्र का जाप करें।आप पर माता की कृपा होगी और घर से कलह दूर होगी।

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नवरात्रि में वास्तु अनुसार खास उपाय से बिजनेस में होगा फायदा

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नवरात्रि के नौ दिन किसी भी तरह की पूजा-पाठ या वास्तु उपाय के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।अगर आप बिजनेस कर रहे हैं और आपको सफलता नहीं मिल रही है तो हो सकता है कि आपके घर या ऑफिस में कहीं वास्तु दोष हो।इस नवरात्रि में वास्तु उपाय करिए और बिजनेस को सफल बनाईए। अलग-अलग बिजनेस के अलग-अलग वास्तु उपाय है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और बिजली के सामान का बिजनेस करते हैं तो आपको अपने सोने के कमरे में क्रिस्टल का विंडचाइम रखना चाहिए।इससे आपके बिजनेस में समय-समय पर जो रुकावट आती है दूर हो जाएगी।
कपड़े के बिजनेस में अगर आप हैं तो आपको सबसे पहले अपनी दुकान के बाहर मुख्य दरवाजे पर लाल रंग का कपड़ा या लाल रंग की पोटली टांग देनी चाहिए।लाल रंग मां लक्ष्मी का प्रतीक है।ऐसा करने से आपके व्यापार में हो रहा नुकसान कम हो जायेगा।
ट्रांसपोर्ट या गाड़ियों के बिजनेस में आप हो तो आपको अपने शोरुम में या काम करने के स्थान पर एक पिरामिड रखना चाहिए।इससे कामकाज में बढ़ोत्तरी होगी।
गहनों के बिजनेस में हैं तो अपने बेडरुम में चांदी का मोरपंख लगा दें या टांग दें।बिजनेस में तेजी से फायदा होगा।
होटल या रोस्टोरेंट के बिजनेस में हैं तो आप अपने ऑफिस में गाय और बछड़े की फोटो लगा दें।आपकी दुकान में तरक्की होगी।

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त्रिफला चूर्ण के फायदे

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त्रिफला चूर्ण तीन जड़ी बूटियों का एक मिश्रण है।इसमे तीन प्रकार के फल हरर,बहेड़ा और आवंला मिला रहता है।तीनो जड़ी को बराबर मात्रा में मिलाकर दर्दरा या पाउडर बना लेते हैं फिर उपयोग में लाते हैं।आयुर्वेद मे त्रिफला को बहुत उत्तम रसायन माना गया है।इसका प्रयोग कई तरह की बिमारीयों में किया जाता है।जिनलोगो को कब्जियत की समस्या है पेट साफ नहीं रहता है उनको त्रिफला के प्रयोग से बहुत लाभ मिलता है।इसके अलावा त्रिफला आंखो के लिए,बालों के लिए और स्कीन के लिए एक बहुत अच्छी औषधि है। कोई पुरानी स्कीन की बिमारी है तो त्रिफला का अलग-अलग ढ़ग से प्रयोग करके अच्छा लाभ मिलता है। आंखो के लिए त्रिफला को रात में पानी में भिंगोकर रख दें सुबह इसको अच्छी तरह छानकर आंखों को धोएं।इससे आंखों की रोशनी को लंबे समय तक बरकरार रखा जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार त्रिफला का उपयोग सिर के बाल से लेकर पैरों के नस तक हर जगह एक अच्छी औषधि की तरह किया जा सकता है।

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क्या आप जानते हैं ऐसे धार्मिक स्थल जहां स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है

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आज भी भारत में कई धार्मिक स्थल ऐसे हैं जहां स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है।मान्यताओं के अनुसार यहां किसी भी तरह के धार्मिक कर्मकांड,दर्शन, पूजा पाठ में स्त्रियों का प्रवेश मना है।

सबरीमला श्री अयप्पा मंदिर

सबरीमला श्री अयप्पा मंदिर केरल में स्थित है।ये मंदिर काफी प्राचीन है।यहां देश से ही नहीं बल्कि विदेश से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।सबरीमला मंदिर में 10 से लेकर 50 वर्ष की आयु वाली स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है।

पद्मनाभस्वामी मंदिर

केरल के तिरुअनंतपुरम में भगवान विष्णु का मंदिर है। देश–विदेश तक इस मंदिर की प्रसिद्धि है। ।पद्मनाभस्वामी मंदिर वैष्णव संप्रदाय का दक्षिण भारत में एक प्रमुख पर्यटन स्थल है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की प्रतीमा सबसे पहले यही मिली थी।कहा जाता है कि इसी कारण यहां मंदिर का निर्माण किया गया।पद्मनाभ मंदिर में भी स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है।

मुक्तागिरी जैन मंदिर

 मध्य प्रदेश के गुना शहर में जैन धर्म की एक प्रमुख धर्मस्थली मुक्तागिरी जैन मंदिर है।प्राचीन मान्यताओं को मानते हुए इस मंदिर में पश्चिमी वेशभूषा में स्त्रियों के प्रवेश पर प्रतिबंध है।मंदिर में प्रवेश करने के लिए स्त्रियों को शुद्ध होकर पारंपरिक वेशभूषा पहननी पड़ती है।

कार्तिकेय मंदिर

राजस्थान के पुष्कर में कार्तिकेय भगवान का मंदिर है।वैसे तो पुष्कर ब्रह्मा जी के मंदिर के लिए दुनिया भर में मशहूर है।यहां ब्रह्मा जी का इकलौता मंदिर है।लेकिन कार्तिकेय मंदिर भी अपनी सुंदरता के लिए दुनिया भऱ में मशहूर है और पर्यटन का प्रमुख स्थल है।लेकिन यहां भी  स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है।

हाजी अली दरगाह

हाजी अली का दरगाह मुंबई में स्थित है।दुनिया भर में मशहूर मुसलमानों का यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। वैसे यहां सभी धर्म के लोग आते हैं।बाबा हाजी अली के दरगाह पर सभी धर्म के लोग अपनी मुराद लेकर आते हैं मनन्त मांगते हैं।बाबा हाजी अली के दरगाह के भीतरी इलाके में स्त्रियों का प्रवेश मना है।इस्लामीक शरियत के अनुसार किसी भी पवित्र कब्र के नजदीक स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है।

जामा मस्जिद

दुनिया की पवित्र मस्जिदों में से एक और भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों के लिस्ट में शुमार है दिल्ली का जामा मस्जिद।जामा मस्जिद में सूर्यास्त के बाद स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है।

हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह

हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह सूफी काल का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।हजरत निजामुद्दीन औलिया चिश्ती घराने के चौथे संत थे।इन्होने वैराग्य की एक मिसाल पेश की थी।यहां पर स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है।

 

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हर रोज एक मंत्र का जाप दूर करेगी हर परेशानी

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हिंदू धर्म के अनुसार पूजा में मंत्र का विशेष स्थान है।लय में मंत्र का जाप करने से कई तरह के फायदे होते हैं।मंत्र के एक हिस्से या छोटे स्वरुप को बीज मंत्र कहते हैं। सभी देवी-देवता का खास बीज मंत्र होता है।जब हम मंत्र का जाप करते हैं तो एक एनर्जी का प्रवाह होता है जो सभी तरह की परेशानी को दूर करता है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ‘ऊँ’ मूल बीज मंत्र है। इससे ही बाकी मंत्र निकला है।

श्रीं

यह मंत्र समर्पण और शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।यह मंत्र चंद्रमा से भी संबंधित है।मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्रीं मंत्र का जाप करना चाहिए है।मां लक्ष्मी समृद्धि की देवी हैं।

ह्रीं

ह्रीं का अर्थ है शक्ति का संचय ।यानि जब हम ह्रीं मंत्र का जाप करते हैं तो हमारे अंदर शक्ति का संचय होता है।यह मंत्र सूर्य के प्रकाश से जुड़ा हुआ है।ह्रीं मंत्र के जाप से देवी कृपा बढ़ती है।ये मां दुर्गा का मंत्र है।

 

क्रीं

क्रीं मां काली को प्रसन्न करने का बीज मंत्र है।इस मंत्र का जाप करने से शक्ति में वृद्धि होती है।इस मंत्र को जलस्वरुप और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।इसमे आधार क अग्नि का प्रतीक और ई की मात्रा शक्ति के तीन कार्य उत्पत्ति,पालन और धारण का जबकि बिंदू ब्रह्म स्वरुप का प्रतीक है। मां काली का ये एकाक्षर मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है।इसीलिए इसे महामंत्र कहा जाता है।

 

क्लीं

किसी भी मनोकामना की पूर्ति के लिए क्लीं मंत्र का जाप बहुत प्रभावशाली है।इससे व्यक्ति के आकर्षण शक्ति में वृद्धि में होती है।क्लीं मंत्र की आकृति को सामने रखकर उपासना करने से फल जल्दी मिलता है।मनोकामना पूर्ति के लिए आकृति में लाल रंग भर कर मंत्र जाप करना चाहिए।आर्थिक लाभ के लिए आकृति में पीला रंग भर कर साधना करना चाहिए।ध्यान करते समय ‘ऊं क्लीं नम:’ का जाप करते रहना चाहिए।काला रंग भर कर मंत्र जाप करने से सिद्धि मिलती है।अगर आप बीमार हैं या किसी तरह के मानसिक संकट में हैं तो आप इसमे हरा रंग भरकर ध्यान करें।अवश्य लाभ होगा।

 

 

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शारदीय नवरात्र ‘कलश स्थापना विधि और मुहूर्त’…..

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करते समय कलश स्थापना जरुर करना चाहिए।कहते हैं कि शुभ कार्य में स्थापित कलश में सभी देवी-देवताओं,नवग्रह,समुद्र,नदियों का वास होता है।पूजा में स्थापित कलश को गणेश का स्वरुप माना गया है।इसीलिए कलश को विघ्न हरता माना गया है।

कलश स्थापना मुहूर्त

नौ दिन तक चलने वाली पूजा में मां दुर्गा के नौ स्वरुप की पूजा की जाती है।नवरात्र पूजा में कलश स्थापना का विधाना है।इसबार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 21 सितंबर गुरुवार को सुबह 6 बजकर 3 मिनट से लेकर 8 बजकर 22 मिनट तक है।वैसे नवरात्र में सभी समय शुभ माना जाता है लेकिन कोशिश करनी चाहिए की कलश स्थापना विशेष मुहूर्त में ही की जाए।किसी कारणवश सुबह के विशेष मुहूर्त में नहीं कर पाये हैं तो अभिजीत मुहूर्त में करें अच्छा रहेगा ।अभीजत मुहूर्त का समय 11 बजकर 36 मिनट से लेकर 12 बजकर 24 मिनट तक है।

कलश स्थापना विधि

सबसे पहले कलश के उपर रोली से ऊं और स्वास्तिक लिखें ।पूजा आरंभ करते समय ‘ऊं पुण्डरीकाक्षाय नम:’ मंत्र से स्वयं पर जल छिड़क कर शुद्धि करें। पूजा स्थान से पूर्व और दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं।दीप जलाते समय ‘ऊं दीपो ज्योति: परब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन: दीपो हरतु में पापं पूजा दीप नमोस्तु ते’ मंत्र का जाप करते रहें।मां दुर्गा की प्रतिमा के बाईं तरफ गणेश जी की प्रतिमा रखें।पूजा स्थान के उत्तर-पूर्व में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज,नदी की रेत और जौ ‘ऊं भूम्यै: नम:’ मंत्र से रखें। कलश में जल, गंगाजल, लौंग,इलाइची, पान, सुपारी,रोली,चंदन,अक्षत,हल्दी,सिक्का,पुष्प डालें। ‘ऊं वरुणाय:नम:’मंत्र से कलश में गंगाजल भर दें।कलश में आम पल्लव(आम के पत्ते) डालें।कटोरे में कच्चा चावल या आटा भरकर कलश पर रखें।लाल रंग के कपड़े में नारियल को लपेटकर कलश पर रखें।कलश को माथे के पास लाते हुए वरुण देवता का ध्यान कर कलश को मिट्टी पर स्थापित करें।कलश स्थापित करने के बाद मां भगवती की अखंड ज्योत जलाएं।अखंड ज्योत नौ दिन तक लगातार जलने दें।ज्योत जलाने के बाद गणेश जी,वरुण देवता,विष्णु जी ,शिव जी ,नवग्रह की पूजा करें।हाथ में फूल लेकर संकल्प लें कि मां मै आज नवरात्र के प्रथम दिन से अभिष्ट कार्य के सफलता के लिए आपकी आराधना कर रही हूं/रहा हूं।मां आप मेरी पूजा स्वीकार करें।मेरी मनोकामना पूर्ण करें।यदि आपको मंत्र नहीं आता तो आप सिर्फ दुर्गासप्तशती के नर्वाण मंत्र से सभी पूजा सामग्री मां को अर्पित करें।मंत्र है ‘ऊं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे’।पूजा में यथा संभव सामग्री से ही आराधना करें।मां को श्रृंगार का सामान और नारियल अवश्य चढ़ाएं।कलश स्थापना कर मां दुर्गा की पूजा करें।पूजा में मां का आवाहन कर आसन दें।वस्त्र,श्रृंगार सामान,सिंदूर,हल्दी,अक्षत,फूल,मिठाई,दीप,फल से पूजा करें।पूजा के पश्चात आरती करें।पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना जरुर करें मां दुर्गा पूजा में कोई भूलचूक हुई है तो क्षमा करें।पूजा में स्टील या लोहे का कलश का उपयोग न करें

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शारदीय नवरात्र ‘कलश स्थापना विधि और मुहूर्त’

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करते समय कलश स्थापना जरुर करना चाहिए।कहते हैं कि शुभ कार्य में स्थापित कलश में सभी देवी-देवताओं,नवग्रह,समुद्र,नदियों का वास होता है।पूजा में स्थापित कलश को गणेश का स्वरुप माना गया है।इसीलिए कलश को विघ्न हरता माना गया है।

कलश स्थापना मुहूर्त

नौ दिन तक चलने वाली पूजा में मां दुर्गा के नौ स्वरुप की पूजा की जाती है।नवरात्र पूजा में कलश स्थापना का विधाना है।इसबार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 21 सितंबर गुरुवार को सुबह 6 बजकर 3 मिनट से लेकर 8 बजकर 22 मिनट तक है।वैसे नवरात्र में सभी समय शुभ माना जाता है लेकिन कोशिश करनी चाहिए की कलश स्थापना विशेष मुहूर्त में ही की जाए।किसी कारणवश सुबह के विशेष मुहूर्त में नहीं कर पाये हैं तो अभिजीत मुहूर्त में करें अच्छा रहेगा ।अभीजत मुहूर्त का समय 11 बजकर 36 मिनट से लेकर 12 बजकर 24 मिनट तक है।

कलश स्थापना विधि

सबसे पहले कलश के उपर रोली से ऊं और स्वास्तिक लिखें ।पूजा आरंभ करते समय ‘ऊं पुण्डरीकाक्षाय नम:’ मंत्र से स्वयं पर जल छिड़क कर शुद्धि करें। पूजा स्थान से पूर्व और दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं।दीप जलाते समय ‘ऊं दीपो ज्योति: परब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन: दीपो हरतु में पापं पूजा दीप नमोस्तु ते’ मंत्र का जाप करते रहें।मां दुर्गा की प्रतिमा के बाईं तरफ गणेश जी की प्रतिमा रखें।पूजा स्थान के उत्तर-पूर्व में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज,नदी की रेत और जौ ‘ऊं भूम्यै: नम:’ मंत्र से रखें। कलश में जल, गंगाजल, लौंग,इलाइची, पान, सुपारी,रोली,चंदन,अक्षत,हल्दी,सिक्का,पुष्प डालें। ‘ऊं वरुणाय:नम:’मंत्र से कलश में गंगाजल भर दें।कलश में आम पल्लव(आम के पत्ते) डालें।कटोरे में कच्चा चावल या आटा भरकर कलश पर रखें।लाल रंग के कपड़े में नारियल को लपेटकर कलश पर रखें।कलश को माथे के पास लाते हुए वरुण देवता का ध्यान कर कलश को मिट्टी पर स्थापित करें।कलश स्थापित करने के बाद मां भगवती की अखंड ज्योत जलाएं।अखंड ज्योत नौ दिन तक लगातार जलने दें।ज्योत जलाने के बाद गणेश जी,वरुण देवता,विष्णु जी ,शिव जी ,नवग्रह की पूजा करें।हाथ में फूल लेकर संकल्प लें कि मां मै आज नवरात्र के प्रथम दिन से अभिष्ट कार्य के सफलता के लिए आपकी आराधना कर रही हूं/रहा हूं।मां आप मेरी पूजा स्वीकार करें।मेरी मनोकामना पूर्ण करें।यदि आपको मंत्र नहीं आता तो आप सिर्फ दुर्गासप्तशती के नर्वाण मंत्र से सभी पूजा सामग्री मां को अर्पित करें।मंत्र है ‘ऊं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे’।पूजा में यथा संभव सामग्री से ही आराधना करें।मां को श्रृंगार का सामान और नारियल अवश्य चढ़ाएं।कलश स्थापना कर मां दुर्गा की पूजा करें।पूजा में मां का आवाहन कर आसन दें।वस्त्र,श्रृंगार सामान,सिंदूर,हल्दी,अक्षत,फूल,मिठाई,दीप,फल से पूजा करें।पूजा के पश्चात आरती करें।पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना जरुर करें मां दुर्गा पूजा में कोई भूलचूक हुई है तो क्षमा करें।पूजा में स्टील या लोहे का कलश का उपयोग न करें

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