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आयुर्वेद के अनुसार व्यक्ति को अपने भोजन में हरी सब्जी और फल को जरुर शामील करना चाहिए।शरीर के आवश्यकता अनुसार भोजन करें जरुरत से ज्यादा या कम ना खाएं।जो भी भोजन करें प्रक़ृतिक तौर तरीके से करें।भोजन समय पर खाएं।ऐसे व्यक्ति के शरीर में वायु (गैस)दबा हुआ (सप्रेस) रहता है इसके विपरीत यदि व्यक्ति का भोजन बासी होता है ,गरिष्ठ होता है ,पचने में भारी होता है,भोजन की मात्रा टेस्ट के अनुसार होता है ना कि आवश्यकता के अनुसार,भोजन का कोई तय समय नहीं होता है तो इस तरह का भोजन पचता नहीं है और वायु प्रकोप का कारण बनता है।व्यक्ति के लाइफ स्टाइल का भी उम्र से सीधा संबंध है।जो व्यक्ति बहुत अधिक तनाव में रहता है,बहुत सारी इच्छाओं को मन में पाल रखता है,एक साथ कई काम कर लेना चाहता है या फिर बहुत जल्दी किसी भी काम का रिजल्ट चाहता है तो ये वायु प्रकोप का कारण बनता है और वायु होने से जल्दी बुढ़ापा आने की समस्या या एजींग होने की समस्या आती है।इसके विपरीत कोई भी सुख देनेवाला काम जिससे की वायु बॉडी में सप्रेस हो जाए एजींग को कम कर देता है।शरीर का दो कंपोनेंट होता है पहला फिजिकल और दुसरा मेंटल।आयुर्वेद के अनुसार फिजिकल ताकत को बढ़ाने के लिए अश्वगंधा,शिलाजित,च्यवनप्राश का प्रयोग करना चाहिए।इससे शरीर की धातुओं को ताकत मिलता है।मेंटल ताकत को बढ़ाने के लिए ब्राह्मी,शंखपुष्पी जैसे मेधा रसायन का प्रयोग करना चाहिए।फिजिकल और मेंटल ताकत को यदि आप बढ़ा लेते हैं तो एजींग कम हो जाती है।आयुर्वेद के अनुसार वायु एजींग का सबसे बड़ा कारण होता है।पंचकर्म चिकित्सा में मसाज के माध्यम से वायु को नियंत्रित किया जाता है।मसाज वायु नियंत्रण का एक बहुत अच्छा जरिया है।शास्त्रों में मसाज की महत्ता का वर्णन मिलता है कहा गया है कि वायु को नियंत्रित करने का सबसे अच्छा माध्यम तेल है।निश्चित समय पर एनीमा को लेना चाहिए।इससे वायु शरीर में इकट्ठा नहीं होने पाता है।आयुर्वेद की इन विधाओं का अपना कर एजींग या बढ़ती उम्र को कम किया जा सकता है।