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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भादो मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्दशी तिथि को अनन्त चतुर्दशी के रुप में मनाया जाता है।मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और संकटो से मुक्ति दिलानेवाला अनन्त सूत्र अवश्य बांधना चाहिए। इसवर्ष अनंत चतुर्दशी 5सितंबर यानि सोमवार को पड़ रहा है।सोमवार को अनंत चतुर्दशी के दिन विशेष संयोग भी बन रहा है विशेष संयोग में आप पूजा करके अनन्त शूत्र बांधते हैं तो भगवान अवश्य ही आपके सभी कष्ट को हर लेंगे।

अननंत चतुर्दशी को विशेष संयोग का समय है प्रात: 6 बजकर 4 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक।इस समय की गई पूजा आपकी हर ईच्छा पूरी करेगी ।

अनन्त चतुर्दशी पूजा का सही विधि-विधान अनंनत चतुर्दशी को व्रत करने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वो सुबह ही स्नान करके नित्य कर्म से मुक्त हो जाए।इसके बाद पूजा स्थान पर कलश रखकर पूजा करें।कलश के उपर भगवान शेषनाग के साथ विष्णु की तस्वीर रखें।फिर एक धागा लेकर उसमे चौदह गांठ लगाकर अनन्त सूत्र बनाए और इसको कलश के समक्ष रख दें। अनन्त पूजा में यमुना, अनन्त और शेष की पूजा की जाती है।यमुना नदी की प्रतीक है शेष नाग के और अनन्त भगवान विष्णु के प्रतीक है।पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु और अनन्त सूत्र की पूजा करें।पूजा के पश्चात  ‘ऊं अनन्तायनम:’मंत्र का जाप करें।अग्निपुराण के अनुसार एक सेर(लगभग एक किलो)आटे का मालपुआ या पूड़ी बनाकर पूजा करनी चाहिए।पूजा के बाद आधा ब्राह्मण को दान कर दें और आधे में से सपरिवार प्रसाद ग्रहण करें।अनन्त पूजा में हर चीज 14 के अनुपात में रखते हैं।कहते हैं कि जोभी व्यक्ति लगातार 14 साल तक अनन्त पूजा करता है उसको मृत्यु के बाद बैकुंठ में स्थान मिलता है।अनन्त पूजा के विषय में कहा जाता है कि यदि आपको कहीं रास्ते में भी गीरा हुआ अनन्त मिलता है तो आप उसको उठा लें और स्वयं भी अनन्त की पूजा करें।

अनन्त चतुर्दशी पूजा कथा पौराणिक कथा के अनुसार कौरवों के हाथ अपना सारा राजपाट गंवाकर पांडव जब वनवास काट रहे थे तो भगावान कृष्ण ने उनको अनन्त चतुर्दशी व्रत करने को कहा था।कहते हैं कि युधिष्ठर द्रौपदी और भाई बंधुओं के साथ अनन्त चतुर्दशी का व्रत किए थे और अनन्त सूत्र को बांधे थे जिससे उनके सारे कष्ट दूर हो गए थे।