ganesh

हमारे हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार गणेश जी को प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा करके पूजा विधि आरंभ की जाती है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी के सभी अंग जीवन और ब्रह्मांड से जुड़े हुए हैं।गणेश जी के सूंड पर धर्म विराजमान है तो दोनों कानों में ऋचा विद्यमान है।दाएं हाथ में वर यानि आशिर्वाद तो बाएं हाथ में अन्न विराजमान है।पेट में समृद्धि तो नाभी में ब्रह्मांड विराजमान है।इसी तरह आंखों में लक्ष्य,पैरों में सातो लोक और मस्तक में ब्रह्मलोक विराजमान है।इसीलिए अगर हम सामने से भगवान गणेश का दर्शन पूजन करते है तो हमको ये सभी प्राप्त होता है।




धर्मशास्त्रों के अनुसार गणेश जी के पीठ पर द्ररिद्रा का वास होता है।यही कारण है कि गणेश जी के पीठ का दर्शन वर्जित है।कहते हैं कि जो लोग गणेश जी पीठ की ओर मुंहकर के या पीठ का दर्शन करके अपना काम करते हैं उनको धन की कमी रहती है।अगर गलती से कभी आप भी पीठ का दर्शन कर लें तो तुरंत गणेश जी से क्षमा प्रार्थना कर लें।इससे आप पर उसका बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।घर में भी अगर आपने गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर लगा रखी है तो उसकी पीठ घर की ओर अंदर की तरफ नहीं होना चाहिए।किसी भी कारण से अगर ऐसे लगाना पड़ जाए तो उस मूर्ति या तस्वीर के दूसरे तरफ भी एक मूर्ति या तस्वीर गणेश जी की लगा देनी चाहिए।दोष खत्म हो जाता है।