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हर वर्ष भादो महीने के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी तिथि को गणेश जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में बड़े धूमधाम से गणेशोत्सव के नाम से मनाया जाता है।इस वर्ष यह उत्सव 25 अगस्त दिन शुक्रवार को पड़ रहा है।हिंदू धर्म में किसी भी धार्मिक कार्य को आरंभ करते समय गणपति की पूजा सर्व प्रथम की जाती है। इसके पिछे भी एक पौराणिक कथा प्रचलति है।कहते हैं कि एकबार शिव जी ने अपने दोनों पुत्र कार्तिकेय और गणेश जी से कहा कि आप दोनों में से जो पहले पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लेगा वही सबसे बुद्धिमान होगा।पिता से आज्ञा मिलते ही कार्तिकेय जी ब्रह्मांड की परिक्रमा करने निकल पड़े जबकि गणेश जी वहीं माता-पिता की तीन परिक्रमा करके पिता से बोले कि वो पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लिए।शिव जी गणेश की बुद्धि से प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिए कि सभी मांगलिक और धार्मिक कार्य में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाएगी।कहते हैं कि तभी से गणेश जी को प्रथम पूज्य गणेश कहा जाता है और सभी मांगलिक और धार्मिक कार्य में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।

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हर वर्ष भादो महीने के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी तिथि को गणेश जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में बड़े धूमधाम से गणेशोत्सव के नाम से मनाया जाता है।इस वर्ष यह उत्सव 25 अगस्त दिन शुक्रवार को पड़ रहा है।हिंदू धर्म में किसी भी धार्मिक कार्य को आरंभ करते समय गणपति की पूजा सर्व प्रथम की जाती है। इसके पिछे भी एक पौराणिक कथा प्रचलति है।कहते हैं कि एकबार शिव जी ने अपने दोनों पुत्र कार्तिकेय और गणेश जी से कहा कि आप दोनों में से जो पहले पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लेगा वही सबसे बुद्धिमान होगा।पिता से आज्ञा मिलते ही कार्तिकेय जी ब्रह्मांड की परिक्रमा करने निकल पड़े जबकि गणेश जी वहीं माता-पिता की तीन परिक्रमा करके पिता से बोले कि वो पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लिए।शिव जी गणेश की बुद्धि से प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिए कि सभी मांगलिक और धार्मिक कार्य में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाएगी।कहते हैं कि तभी से गणेश जी को प्रथम पूज्य गणेश कहा जाता है और सभी मांगलिक और धार्मिक कार्य में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।


वैसे तो पूरे देश में ही गणेशोत्सव मनाया जाता है लेकिन महाराष्ट्र में इसकी खास धूम रहती है।10 दिन तक चलने वाले इस उत्सव में पूरा महाराष्ट्र गणेशमय हो जाता है।हर तरफ गणपति की प्रतीमा रखकर पूजा की जाती है।गणपति पूजा की खास बात ये है कि इसमे सभी अपनी मनोकामना के अनुसार गणपति प्रतिमा स्थापित करते हैं और पूजा करते हैं।कोई एक दिन के लिए तो कोई चार दिन के लिए या फिर कुछ लोग पूरे 10 दिन के लिए प्रतिमा स्थापित करते हैं।इस वर्ष गणेशोत्सव 10 के बजाय 11 दिन का है।क्योंकि इसबार दशमी तिथि 31अगस्त और 1 सितंबर दोनों दिन पड़ रही है।