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हरतालिका तीज व्रत हर साल भादो मास के शुक्ल पक्ष के तृतिया के दिन किया जाता है।यह व्रत विशेष तौर पर महिलाएं और कुंवारी कन्याएं करती हैं।इसबार हरतालिका तीज व्रत 24 अगस्त गुरुवार को पड़ रहा है।हरतालिक तीज व्रत में मुहूर्त और पूजा विधि की खास महत्व है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पार्वती जी को भगवान शिव को पति रुप में पाने के लिए 108 जन्म लेना पड़ा।108वें जन्म में जाकर मां पार्वती की यह तपस्या सफल हुई भगवान शिव ने उनको अपनी अर्धांगिनी स्वीकार किया। अब आपके मन में ये विचार आता होगा की इस व्रत का नाम हरतालिका क्यों पड़ा।तो आपको बताते हैं हरतालिका दो शब्दों से मिलकर बना है हरत और आलिका ।हरत का अर्थ है हरण और आलिका का अर्थ है सखियां।इस नाम के पिछे की कहानी भी बहुचत दिलचस्प है।

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कहते हैं कि एकबार नारद जी माता पार्वती के पिता पर्वत राज हिमालय से मिले और उनसे कहा कि आपकी पुत्री विवाह के योग्य हो गई है अब आपको उसका विवाह कर देना चाहिए।पर्वतराज से अनुमति लेकर नारद जी विष्णु जी के पास पहुंचे और उनसे कहा कि पर्वतराज अपनी कन्या का विवाह आपके साथ करना चाहते हैं।इधर पिता से विष्णु के साथ अपने विवाह की बात सुनकर पार्वती उदास हो गई ।पार्वती ने अपनी परेशानी का कारण अपनी सखियों को बताया।पार्वती को दुखी देखकर उनकी सखियां उनका हरण करके जंगल ले गई।जहां पार्वती जी शिव को पति रुप में पाने के लिए तपस्या करने लगी।चूंकि सखियों ने उनका हरण किया था इसीलिए इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा।

हरतालिका पूजा का शुभ मुहूर्त सामान्य तौर पर हरतालिका पूजा प्रदोषकाल में बेहतर मानी जाती है।इसबार प्रदोषकाल का मुहूर्त है शाम को 6 बजकर 47 मिनट से रात के 8 बजकर 27 मिनट तक।

अब आपको बताते हैं कि हरतालिका व्रत में पूजा में किन-किन सामग्री का होना आवश्यक है।

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हरतालिका व्रत में पूजा के लिए गीली काली मिट्टी लें,केले का पत्ता लें,बेलपत्र लें, शम्मी के पत्ते ले आक के फूल और लाल फूल लें, फल लें,मां पार्वती को चढ़ाने के लिए श्रृंगार सामग्री लें।प्रसाद के तौर पर बहुत जगह गुझिया चढ़ाने का प्रचलन है ।इसके अलावा आप दूसरी मिठाई भी भोग की तरह चढ़ा सकते हैं। शाम के समय स्वयं पूरा श्रृंगार करके पूजा करें। हरतालिका पूजा में गणेश जी शिव जी और मां पार्वती की पूजा की जाती है।सबसे पहले कलश रखते हैं कलश पर नारियल रखकर कलावा बांधकर दीप जलाकर पूजा आरंभ करते हैं।फिर गणेश जी की पूजा करते हैं।उसके बाद शिव जी और मां पार्वती की पूजा करते हैं।पूजा के बाद हरतालिका व्रत कथा सुनते हैं।रात भर रतजगा करते हैं। हरतालिका व्रत निराजल व्रत है इसलिए इसका पारण अगली सुबह सूर्योदय के बाद करते हैं।इस तरह ये अचल सुहाग का व्रत पूर्ण होता है।