पौराणिक मान्यताओं के अनुसार घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियां जागृत हो दाती हैं उनमे चेतना आ जाती है।इसके बाद की गई पूजा ज्यादा फलदाई होती है।घंटी से निकली मनमोहक ध्वनी मस्तिष्क को अध्यात्म की भावान से सराबोर कर देता है। मन को शांति मिलती है।कहते हैं कि जब आप घंटी बजाते हैं तो आपके कई जन्मो के पाप कट जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार जब सृष्टि का आरंभ हुआ था जो आवाज आई थी वही आवाज घंटी से आती है।मंदिर के बाहर स्थित घंटी को काल का भी प्रतीक मानते हैं।सामान्यत: चार प्रकार की घंटी मानी गई है।

गरुड़ घंटी घर में मंदिर में जो घँटी हम बजाते हैं।ये घंटी हाथ से पकड़कर बजाई जाती है।

द्वार घंटी ये घर के दरवाजे पर लटकती रहती है ।ये बड़ी या छोटी किसी भी आकार की हो सकती है।

हाथ घंटी पीतल की एक गोल ठोस प्लेट होती है।जिसको मोटे लकड़ी के टुकड़े से बजाया जाता है।

घंटा ये बहुत बड़े आकार का होता है और मंदिर में प्रवेश द्वार और मंदिर के गर्भ गृह के बीच खाली स्थान में लगा रहता है।इसकी आवाज इतनी तेज होती है कि कई किलोमीटर तक सुनाई देती है। इन बातों के अलावे मंदिर में घंटी लगाने का वैज्ञानिक कारण भी माना जाता है।जिस स्थान पर घंटी बजने की आवाज नियमित आती है वहां का वातावरण शुद्ध रहता है।नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।