krishna

श्री कृष्ण जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का दिन है।भादो महीने के कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था।इस वर्ष यह त्यौहार 14 और 15 अगस्त को मनाया जा रहा है।जो लोग सूर्योदय से तिथि की गणना करते हैं वह ये त्यौहार 15 अगस्त को मना रहे हैं।भगवान कृष्ण का यह अवतार अपने अत्याचारी मामा कंस के विनाश के लिए हुआ था।जन्माष्टमी के दिन मंदिरो को विशेष तौर पर सजाया जाता है।घरो में भी मंदिर का श्रृंगार किया जाता है।

भगवान कृष्ण का जन्म रात में 12 बजे हुआ था ।इसीलिए जन्माष्टमी के दिन रात में 12 बजे के बाद भगवान कृष्ण का विधि –विधान से जन्म कराकर पूजा करनी चाहिए। इसके लिए एक प्लेट लें।प्लेट में खीरा रखकर इसको बीच से काटकर भगवान का जन्म करवाए। ये सूचक है कि प्रसव के समय किस प्रकार बच्चे की नाल काटी जाती है।इसके बाद भगवान कृष्ण का अभिषेक करें दूध से, घी से, शहद से, पंचामृत से, जल से।फिर भगवान कृष्ण को पिले वस्त्र पहनाएं। पूजा में भगवान के पास बांसुरी और मोर पंख अवश्य रखें।भगवान को माखन मिसरी का भोग लगाएं।जिस खीरे से जन्म कराए हैं उसको प्रसाद की तरह ग्रहण करें।पंजीरी का भोग लगाए।मंत्र का जाप करें।मंत्र है ‘हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे,कृष्ण हरे कृष्ण हरे,कृष्ण कृष्ण, हरे हेर’। इस मंत्र के जाप से अभिष्ट की प्राप्ती होती है और काम में आ रही सभी बाधा दूर हो जाती है। कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत में रात में रतजगा का बहुत महत्व है।कहते हैं कि इस दिन रात में जगकर भगवान कृष्ण की आराधना करने से जीवन में व्यकित हर सुख को प्राप्त करता है।