04_08_2016-lakshmi

हिंदू धर्म के अनुसार पूजा में मंत्र का विशेष स्थान है।लय में मंत्र का जाप करने से कई तरह के फायदे होते हैं।मंत्र के एक हिस्से या छोटे स्वरुप को बीज मंत्र कहते हैं। सभी देवी-देवता का खास बीज मंत्र होता है।जब हम मंत्र का जाप करते हैं तो एक एनर्जी का प्रवाह होता है जो सभी तरह की परेशानी को दूर करता है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ‘ऊँ’ मूल बीज मंत्र है। इससे ही बाकी मंत्र निकला है।

श्रीं

यह मंत्र समर्पण और शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।यह मंत्र चंद्रमा से भी संबंधित है।मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्रीं मंत्र का जाप करना चाहिए है।मां लक्ष्मी समृद्धि की देवी हैं।

ह्रीं

ह्रीं का अर्थ है शक्ति का संचय ।यानि जब हम ह्रीं मंत्र का जाप करते हैं तो हमारे अंदर शक्ति का संचय होता है।यह मंत्र सूर्य के प्रकाश से जुड़ा हुआ है।ह्रीं मंत्र के जाप से देवी कृपा बढ़ती है।ये मां दुर्गा का मंत्र है।

 

क्रीं

क्रीं मां काली को प्रसन्न करने का बीज मंत्र है।इस मंत्र का जाप करने से शक्ति में वृद्धि होती है।इस मंत्र को जलस्वरुप और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।इसमे आधार क अग्नि का प्रतीक और ई की मात्रा शक्ति के तीन कार्य उत्पत्ति,पालन और धारण का जबकि बिंदू ब्रह्म स्वरुप का प्रतीक है। मां काली का ये एकाक्षर मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है।इसीलिए इसे महामंत्र कहा जाता है।

 

क्लीं

किसी भी मनोकामना की पूर्ति के लिए क्लीं मंत्र का जाप बहुत प्रभावशाली है।इससे व्यक्ति के आकर्षण शक्ति में वृद्धि में होती है।क्लीं मंत्र की आकृति को सामने रखकर उपासना करने से फल जल्दी मिलता है।मनोकामना पूर्ति के लिए आकृति में लाल रंग भर कर मंत्र जाप करना चाहिए।आर्थिक लाभ के लिए आकृति में पीला रंग भर कर साधना करना चाहिए।ध्यान करते समय ‘ऊं क्लीं नम:’ का जाप करते रहना चाहिए।काला रंग भर कर मंत्र जाप करने से सिद्धि मिलती है।अगर आप बीमार हैं या किसी तरह के मानसिक संकट में हैं तो आप इसमे हरा रंग भरकर ध्यान करें।अवश्य लाभ होगा।