सूडान की मॉडल ने बदली सौंदर्य की परिभाषा

black model

इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ का सौंदर्य के प्रति विशेष झुकाव था, अपनी त्वचा को और अधिक गोरा बनाने के लिए वह सफेद सूरमा का इस्तेमाल करती थी क्योंकि उनका मानना था कि कांतिहीन चेहरे की अपेक्षा गोरी रंगत से शक्ति, चमक और ग्लैमर सबकुछ सरलता से प्राप्त होता है। गोरी त्वचा को सफलता का प्रतीक समझा गया है। यह विचारधारा भारत देश में तो बखूबी देखने को मिलती है, गोरे रंग को यहां तो सौंदर्य का प्रतीक माना गया है। जो युवती गोरी है केवल वही खूबसूरत है,ऐसे विचार अभी भी देखने को मिलते हैं। इसका विचार आगे चलकर फेयरनेस क्रीम के रूप में अधिक देखने को मिलता है, कभी विवाह के प्रोमिस के रूप में दर्शाया जाता है तो कभी शानदार कैरियर मिलने के रूप में दिखाया जाता है। केवल यहीं नहीं और भी बहुत कुछ आपको सरलता से मिलता है यदि आप गोरी त्वचा की है।

प्रायः माना गया है कि गोरा रंग खूबसूरती का प्रतीक है और काले रंग को बदसूरत .लेकिन अब धीरे धीरे विचाराधारा में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। डस्की रंग को खूबसूरत और अपीलिंग माना जाने लगा है। बॉलीवुड ब्यूटीज व मॉडल को उनकी गहरी रंगत के बावजूद भी सौंदर्य से परिपूर्ण समझा जा रहा है।  

beauty in black